श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार। श्रीस्वामी हरिदास उद्धरे रसिक अनन्यनि कौ आधार। [1] नित्य प्रकट गावत नहिं पावत सब श्रुति तत्व विचार। इहि निजु नाम, धाम, वृन्...