सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री छबीले
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री छबीले वाणी संग्रह

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जै जै मचों ब्रज में चहूँ ओर ते बोल रहे नर नारी जौ जै जै

ब्रजभूमि में चारों ओर नर-नारी उत्साह से पुकार रहे हैं—“जै-जै युगल सरकार की!” [1] समस्त देवतागण अपने-अपने विमानों से एवं ब्रह्मा-भगवान शंकर भी जै-जैका...

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वसुधा के सुधा जग की सुखमा

श्रीराधिका वसुधा (पृथ्वी) की सुधा (अमृत) हैं और जगत की परम सुखमयी शोभा हैं; वे मुनियों के मन की मंजुल अभिलाषा हैं। जो सदा सुख की मूल हैं और दुख-द्वंद्...

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तजि सब आस, करै वृन्दावन वास खास

सभी आशाओं को त्यागकर वृंदावन में निवास करना चाहिए और प्रेमपूर्वक निष्कपट भाव से कुञ्ज-निकुंजों की सेवा में लीन रहना चाहिए। [1] जप, तप, योग, यज्ञ, सं...

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वन्दत है तीनों लोक, आनंद अपार मान

जिन चरणों की वंदना तीनों लोकों में होती है और जिनका आनंद अपार है, उन चरणों का वंदन स्वयं धरती को अपने फन पर धारण करने वाले शेषनाग भी करते हैं। [1] जि...

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कलिकाल कलेशन काटें सबै

श्रीराधा-नाम के स्मरण से कलियुग के कष्ट मिट जाते हैं, जीवन की सारी बाधाएँ और भवसागर का बंधन समाप्त हो जाता है। [1] राधा-नाम के प्रभाव से रात-दिन अनंत...

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एक हु बेर पुकारत आरत

जब कोई दीन आर्त भरी पुकार से उसे एक बार भी पुकारता है, तो वह सुनता है। [1] वह उसे ऊँचा या नीचा नहीं समझता; अपितु भुजाओं से पकड़ कर अपने गले से लगा ल...

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अजन्म सदाँ जहाँ जन्म लियौ

जो भगवान सदा अजन्मा होते हुए भी ब्रज में जन्म लेते हैं, उस ब्रज धाम में रहने वाला जीव संसार-सागर में कभी नहीं फँसता। [1] जो अनंत ब्रह्मांडों के रचयित...

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या जग में ब्रज सौ नहिं देश

इस संसार में ब्रज जैसा कोई स्थान नहीं है, और न ही ब्रजवासियों के समान कोई नर या नारी। [1] यहां सूर्यपुत्री श्री यमुना जी स्वयं अपने दिव्य स्वरूप में ...