श्री सेवक जी कहते हैं "अब मैं श्री हरिवंश की रसोपासना की सुन्दर परिपाटी सुनाता हूँ जिसमें श्यामाश्याम का एक साथ गान किया जाता है। [1] इन दोनों में एक ...