सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री द्वारकेश
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री द्वारकेश वाणी संग्रह

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ब्रज की महारानी है राधा

श्री राधा ब्रज की महारानी हैं, जो ललितकिशोर श्री श्यामसुंदर के रसपीपासू चित्त को सदा सुख प्रदान करने वाली हैं। [1] जो श्री कृष्ण, कामदेव को भी मोहित ...

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ब्रज की ठकुराईन है श्यामा

ब्रज की ठकुराइन, अर्थात ब्रज की अधिष्ठात्री, श्री श्यामा हैं, जिनके चरण-कमलों की रज की सेवा के लिए लक्ष्मी जी भी याचना करती हैं। [1] उन्हीं श्री राधा...

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हम तो हैं प्रिय रमण उपासी

हम अपने प्रिय प्रभु के प्रति समर्पित हैं। निर्भय होकर, हम उनके कमल चरणों की छाया में वास करते हैं, अन्य सब से उदासीन रहते हैं। [1] रात दिन, हम उनकी र...

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बसियें बास सुबस बरसानों

जहाँ का वास अति सुन्दर और पावन है, ऐसे बरसाना धाम की शरण में वास करो, जहाँ वृषभानु नंदिनी श्री राधा विराजमान हैं, जिन्हें रसिक कुंवरि के नाम से जगत मे...

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सदा सखि सुन व्रज ही में रहनो

हे सखी! सुनो हम केवल ब्रज में ही सदा वास करेंगें। वहाँ अपने हृदय की पीड़ा को कुंजों के हर पत्ते एवं हर लता से कहेंगें। [1] अब मुझे और किसी से कोई प्र...

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प्रेम-पंथ को पेंडो हि न्यारो

प्रेम का मार्ग बहुत निराला है। न दिन में चैन आता है न रात को निद्रा, जब प्रियतम ह्रदय में बसता है। [1] जिसने प्रेम का अनुभव किया है वही जानता है, कैस...

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नवल नवनागरी रूप गुण आगरी

श्री श्यामा (राधा) नित्य नवीन, अनुपम नागरी हैं, जो रूप और गुणों की खान हैं। वे अत्यन्त सुभग, ललित और राजराजेश्वरी स्वरूपा हैं। [1] नित्य नवीन रस से ...

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प्रकट भई रावल श्री राधा

श्री राधा भाद्रपद माह के अनुराधा नामक नक्षत्र में रावल में उज्ज्वल आठवें दिन प्रकट हुई हैं। वह साक्षात प्रेम एवं सौंदर्य का अवतार हैं। [1] उनके पिता ...

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सखि! सुन सुधि आवत वा ब्रज की

हे सखी, सुन! मुझे ब्रज की सुधि (याद) आ रही है जहां गोवर्धन में स्थित तलहटी की दिव्य रज विद्यमान है जिसके निकट हरि के सर्वश्रेष्ठ दास, सदा निवास करते ह...