सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री घनानंद
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री घनानंद वाणी संग्रह

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हीन भएँ जल मीन अधीन

जल से अलग होकर मछली बहुत पीड़ित होती है, पर क्या उसका यह कष्ट मेरे कष्ट की बराबरी कर सकता है? [1] अपने प्रिय जल का संग छोड़कर, और उसे कलंकित कर, वह क...

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रसिक-सिरोमनि सुजान सुधानिधि हू की

रसिक शिरोमणि श्री कृष्ण की रसना को भी रस में भिगाने वाला राधा नाम रसीला रस धाम है। [1] जिस प्रकार चातक को स्वाति की बूँद को ही ग्रहण करने की अभिलाषा ...

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गुरनि बतायौ राधा मोहन हूँ गायौ

रसिक गुरुओं ने बताया है कि श्री धाम वृंदावन अगाध रस का धाम है जहां निवास करके श्री प्रिया प्रियतम का यशोगान करना चाहिए। [1] इस भूमंडल पर स्थित श्री ध...

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अति सुधौ सनेह को मारग है

प्रेम का मार्ग अत्यंत सीधा है, जहाँ थोड़ी-सी भी चालाकी के साथ चलना असंभव है। [1] इस मार्ग में सच्चाई से ही चला जाता है और अपने आप को सदा न्योछावर करक...

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कमला तप साधि अराधति है

श्री लक्ष्मीजी कठोर तपस्या कर श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं, मानो अभिलाषा रूपी महोदधि (समुद्र) में अवगाहन करने के लिए तपस्या कर रही हों। [1] श्रीकृष्ण...

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पहचानै हरि कौन, मो से अनपहचान कों

हे हरि! मुझ जैसे अपरिचित को कौन पहचान सकता है। जिस प्रकार आपके नेत्रों के बीच कृपा रूपी कान छिपे हुए हैं, उसी प्रकार मेरे मौन में पुकार छुपी हुई है। (...

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चन्द चकोर की चाह करै

हे प्रियतम! कल्पना करो, कैसी अद्भुत लीला होगी यदि चंद्रमा चकोर के पीछे भागे और स्वाति का मेघ पपीहे के पास स्वयं आ पहुँचे। [1] यदि सूर्य त्रसरेणु [सूर...

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प्रीतम सुजान मेरे हित के निधान कहौ

हे मेरे प्रेम के आधार, मुझे सुजान प्रियतम श्री श्याम सुंदर! तुम ही बताओ, यदि तुम ही मुझसे रूठकर आलस्य दिखाओगे [मिलने से हिचकिचाओगे] तो फिर मेरे प्राण ...

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ललित फागु रचना रची

परम मनोहर फाग (होली-विलास) की रचना रची गई है, और मधुर बसंत ऋतु आनंदपूर्वक शोभित हो रही है। माधव की प्रियतमा श्री राधा जू की जय हो, वनमाली प्रियतम श्री...

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मेंहदी रची कुंवरि के पाइन

श्री राधा के चरण कमलों में मेहँदी रची है। उनके नख कोमल एवं सुन्दर हैं जो उनके श्री चरणों की शोभा को विविध प्रकार से बढ़ा रही है। [1] श्री राधा के चरण...