स्वामी श्री हरिदास जी की विशुद्ध नित्य-विहार उपासना में न तो संगम-तीर्थ (कुंभ स्नान) का महत्व है और न ही सूतक एवं पातक का। [1] यहाँ तो वैकुण्ठ के सुख...