सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री केशवाचार्य
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री केशवाचार्य वाणी संग्रह

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राधा स्कन्धे वामबाहुप्रकोष्ठं

राधा स्कन्धे वामबाहुप्रकोष्ठं धृत्वा कृष्णः मन्द मन्दंविहस्य। पश्यन् प्राचीं पाटलां सुप्रभाते हास्यं लेभे यत्र तन्मेनिजेष्टः॥ - श्री केशवाचार्य, गोवर...

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स्फीतां गोवर्धनाद्रे: श्रियमियशोभितो

स्फीतां गोवर्धनाद्रे: श्रियमियशोभितो वैक्षितुं नेत्रकोटौँ श्रोतुं तस्याय दिव्यां प्रिय गुण गणानां कर्णकोटि तथैव। जिह्वाकोटिं तदीयामृतमयचरितं वर्णितुं...

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यच्चेतसि स्फुरति नित्त्य विलास

श्री गोवर्धन राज की जय हो जो श्री कृष्ण चंद्र का नित्य विलास धाम हैं जो समस्त केली कलाओं का निधान है। श्री कृष्ण चन्द्र के चरणों से रंजित इस धाम की रज...

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नमामि गोवर्धनपादपल्लवं

श्री गिरिराज गोवर्धन के चरणों का वंदन करता हूँ, श्री गिरिराज गोवर्धन के उज्जवल रूप का स्मरण करता हूँ, एवं वाणी से परम मंगल गोवर्धन नाम का उच्चारण करता...

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विष्णोर्निवासमपरे त्रिपुरारि

जो कोई अपनी सुबुद्धि के दारा विष्णुलोक में अथवा शिवलोक में निवास करना चाहता है वे भली प्रकार करें किन्तु हम तो यही चाहते हैं कि कालान्तर में जब कभी जन...

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सर्व साधन हीनञ्च

हे शैल-राज श्री गोवर्धन, देखो, यद्यपि मैं सकल साधनहीन, अति दीन और कुबुद्धि हूँ, तथापि आप मेरी उपेक्षा करने योग्य नहीं हैं अर्थात्, शरणागत को आप आश्रय ...

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भूयादुपत्यकायामधित्त्यकायां गिरे: क्वचिद्‌ वास

यदि मैंने अपने जीवन में विशुद्ध भाव से गुरु/भक्तों की निष्काम सेवा की हो तो श्री गिरिराज के निकट भूमि (तलहटी) में कहीं पर मेरा निवास हो।

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अखिल जनन बीथी भुक्त नाना प्रयासै

अनेक जन्म रूप बीथि (गलियों) भें घूमते घूमते अनेक तरह के कष्टों को भोगते हुए अनेक प्रयत्नों से किसी तरह से इस दुर्लभ मानव जन्म को मैंने प्राप्त तो कर ल...

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केचिद्भजन्ति कृतिनो गिरिजामथान्ये

कोई कुशल जन गिरिजा (पार्वती) जी की आराधना करते हैं, कोई शिवजी की तथा कोई सूर्य-भगवान की सेवा करते हैं। कोई वह हैं जो गणेश जी की, कोई इंद्र की तथा कोई ...

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गोवर्धने कृता येन प्रीतिः श्री हरिवल्लभे

जिसने मनुष्य जन्म धारण कर भगवान् श्री कृष्णचन्द्र के प्रियतम श्री गोवर्द्धन में प्रेम किया उसने संसार में सब कुछ शुभ-कार्य सष्पादन कर लिया अर्थात् उस ...