सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री लाड़लीदास
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री लाड़लीदास वाणी संग्रह

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प्रगट महल वृंदाविपिन महली श्यामा श्याम

साधक को यह अटूट भाव हृदय में धारण करना चाहिए कि यह वृंदावन ही श्रीश्यामा-श्याम का साक्षात निकुंज-महल है, जहाँ के समस्त नर-नारी उनकी अष्टयाम सेवा में न...

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‘रा’ अक्षर श्रीगौरतन ‘धा’ अक्षर घनश्याम

‘राधा’ नाम के गूढ़ रहस्य को प्रकट करते हुए श्री लाड़लीदास कहते हैं कि ‘रा’ अक्षर साक्षात् श्री गौरवर्णा श्री प्रिया जी (राधा रानी) का स्वरूप है और ‘धा’...

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बल्लभ हू के गुरु सदा

श्री श्यामसुंदर की गुरु श्री राधा ही हैं, जो उन्हें समस्त सुखों का दान करने वाली हैं।

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गौर श्याम रस सिन्धु में केलि तरंग अपार

गौर और श्याम (श्यामा-श्याम) रस के अगाध सिंधु हैं, जिसमें नित्य-विहार की अनंत केली तरंगें हिलोरें लेती हैं। रसिक जन युगों से इनके इसी पावन यश का गायन क...

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गौर देत नित सर्व सुख श्याम रूप ह्वै लेत

श्री “राधा” नाम में रा और धा दो अक्षर हैं। रा दाने धातु का अर्थ है देना और धा का अर्थ है धारण करना। अत: गौर श्री राधा नित्य सर्व सुख देने वाली हैं और ...

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कृपा-कृपा सबही कहैं कृपा पात्र नहीं कोय

कृपा कृपा तो सब ही कहते हैं परन्तु कृपा-पात्र शिष्य कोई नहीं होता। कृपा पात्र केवल वही होता है जो अपने गुरुदेव का आज्ञावर्ती होता है।