सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री मोहनचंद
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री मोहनचंद वाणी संग्रह

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प्रेमपूरि पूरित प्रतेक नेत्र भंगिनीम

आपकी प्रत्येक आँखें प्रेम रूप की पूर्णता से चंचल हैं। आपका ह्रदय सदैव नंदनंदन श्री कृष्ण संग के प्रेम के रंग से रंगा हुआ है। आप अति प्रवीणता से अपने स...

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गोकुलेन्द्र सुनूमत्त भृंग चारु मल्लिकां

हे श्री राधिका, आप अति सुन्दर चमेली के पुष्प समान हैं, जिस पर गोकुल के स्वामी श्री कृष्ण की आँखें (भृंग के समान मत्त) टिकी हैं। शुद्धतम प्रेम की भावना...

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अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्

आपका अंग वह रत्न है जिसकी आभा समस्त व्रज मंडल को मोहित किये हुए है, जिसे श्री कृष्ण गुप्त रूप से अपने पास रखते हैं। आपका मुख कमल पूर्ण चन्द्रमा की भां...

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गोपनागरेन्द्र कत्थितोरि काल कारिणीम्

जो भी व्रज के राजकुमार श्री कृष्ण को अपशब्द कहता है उसके लिए आप काल का रूप धारण कर लेती हैं। आप श्री कृष्ण की बांसुरी चुरा लेती हैं, जिसके गीत और तान ...

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मंजु मेघ सार गन्ध

हे श्री राधिका जू, आपका सम्पूर्ण अंग वर्षा के बादलों की सुगंध का जो सार है, उसके भी सार से सुवासित है। आपके भाल पर नील वर्ण की बिंदी सुशोभित है और आप...

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प्रेमसात यात लोभ हर्षणेन

हे श्री राधिका जू, आपका ह्रदय प्रेम से सुशोभित है, जिसके लोभ से सदैव श्री कृष्ण हर्षित रहते हैं। आप प्रेम की रीति में अति निपुण हैं और महारास क्रीड़ा म...

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प्रीति विह्वल प्रिय प्रकृष्ट

आपके प्रेम में विह्वल श्री कृष्ण के विशाल वक्ष स्थल पर आप शयन करती हैं। आप श्री कृष्ण को अति विनम्रता पूर्वक अपनी सुमधुर वाणी से भाव प्रदान करतीं हैं।...

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इन्द्र गोप कान्ति हारिम्

हे श्री राधिका जू, आपने गिरिराज पर्वत को धारण कर श्री कृष्ण को उसकी छाया में रखा। आपकी भृकुटि की चंचलता श्री कृष्ण के हृदय की तृष्णा का हरण कर लेती है...

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एतद्दष्टकं सुचारुं सर्व

हे श्री राधे! इन 8 श्लोकों में आपके सदगुणों का गान स्वयं आपके प्रियतम श्री कृष्ण ने मधुर वाणी से किया है। वह सदैव आपके प्रेम में वर्द्धन करने के लिए आ...