सभी संत
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रसिक संत जीवनी
श्री नागरीदेव जु की वाणी
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री श्री नागरीदेव जु की वाणी वाणी संग्रह
general
लोक वेद मरजाद गहैं न लहै
अनन्य रसिक जनों की रति को समझाते हुए श्री नागरीदेव जी कहते हैं कि यदि कोई उपासक श्री वृंदावन धाम की विशुद्ध प्रेमरस उपासना में लोक और वेद की मर्यादा क...
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चात्रिक ज्यौं घन चंद चकोर
अनन्य रसिक जनों की रति समझाते हुए श्री नागरीदेव जी कहते हैं कि जिस प्रकार चातक पक्षी की अनन्य रति स्वाति-घन में, चकोर की चंद्रमा में होती है, वैसे ही ...
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नित्य विहार सार सबको
'नित्य विहार' सभी ग्रंथों, वेदों आदि का सार है, जिसका न आदि है न अंत—जो अत्यंत दुर्लभ है।