श्री नरहरि देव जी कहते है, जो कृपापात्र जीव श्री बिहारी जी को आँख भर [भावपूर्ण] निहार लेता है, वो एक प्रकार का बावरा (पागल) हो जाता है, जैसे सावन ऋतु ...