सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री प्रेमदास
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री प्रेमदास वाणी संग्रह

general

अलबेली मोहे राखो चरण शरण कर

हे अलबेली [श्री राधे], मेरी यही कामना है कि तुम मुझे अपनी चरण शरण में सदैव रखो, क्योंकि हे श्री सुंदरी, इस समस्त जगत में मेरा तुम्हारे सिवा कोई नहीं ...

general

प्रान धन वृन्दावन ताकौं न विसार मन

श्री प्रेमदास जी कहते हैं, "हे मन, अपने प्राणों के धन श्री वृंदावन को कभी न भूलना। यहाँ की लताओं की अद्भुत सुंदरता देखो, कैसे छवि बिखेरकर अपनी शोभा लु...

general

किशोरी मोहे कब कहोगी मेरी

किशोरी जी मुझे कब आप अपना कहोगी। कब आप मुझपर प्रसन्न होकर अपनी कुछ सेवा कहोगी; कब मैं तुम्हारी कहलाऊँगी। [1] कब मैं वृंदावन के वृक्षों की कुंजलताओं म...

general

नमो नमो वृंदाविपिन

मैं श्री वृंदावन धाम की परम पावन भूमि को बार-बार नमन करता हूँ, जो आनंद की राशि है। मैं सभी ब्रजवासियों को बार बार नमन करता हूँ, उन्हींके चरणों का मुझे...

general

श्रीवृन्दावन वासी हैं हम

हम श्री वृंदावन के वासी हैं। हम किसी अन्य देवी, देवता एवं पितर को नहीं जानते, हम तो संतों के चरणों के उपासक हैं। [1] हमारे सेव्य दिव्य दंपति श्री किश...

general

जा पर तू अनुकूल किशोरी

जिसकी तरफ़ साक्षात श्री कृष्ण की स्वामिनी, श्री राधा महारानी होती हैं, उसका माया क्या बिगाड़ सकती है? [1] यद्यपि यह माया अत्यंत बलवान है, फिर भी श्री...