श्री प्रेमी
जीवन चरित
श्री श्री प्रेमी वाणी संग्रह
मन भूल मत जैयो राधा रानी के चरण
हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। श्यामा प्यारी के दिव्य चरण कमल, और ठाकुर बांके बिहारी की मनमोहिनी ठकुरानी के चरण कमल। [1] वृषभानु नंद...
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर तीनों लोकन हूँ में नाय
ऐसा चटकीला एवं मटकीला बाँके बिहारी जैसा ठाकुर तो तीनों लोकों में कहीं नहीं है। [1] यह तीन ठौर से टेढ़ा है जिसके करतब नट के समान हैं एवं अपनी तिरछे नय...
भूमि तत्व जल तत्व अग्नि तत्व पवन तत्व
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, ब्रह्मा, विष्णु और अन्य सभी तत्व श्री राधा के ही अंश हैं। [1] नारद, इंद्र, शिव, सनकादि और अन्य दिव्य जन, यहाँ तक कि आनंद भी...
प्रेम सरोवर छाँड़ि कैं तू
हे मन! प्रेम के सरोवर को छोड़कर तू क्यों संसार में भटक रहा है? जहाँ गेंदा और गुलाब जैसे सुंदर पुष्प खिले हैं, वहाँ छोड़कर तू करील की सूखी झाड़ियों की ...
मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण
मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी अरे मन, श्री राधारानी के चरणों को भूल मत जाना।
प्रीत जानके ही थोरी तोहे राखेगी शरण
प्रीत जानके ही थोरी तोहे राखेगी शरण। मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी श्री राधा हमारी थोड़ी सी प्रीत जान कर ही अपनी शरण में रखती हैं...
ऐ रे मन मतवारे छोड़ दुनियाँ के द्वारे
अरे मेरे मूर्ख मतवारे मन, तू दुनिया के द्वारों में भटकन छोड़ दे। अब तो तू केवल और केवल राधा नाम को ही सहारा बना और जीवन मरण श्री राधा रानी को सौंप दे।