सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री रस निधि
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री रस निधि वाणी संग्रह

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को अवराधे जोग तुव, रहु रे मधुकर मौन

गोपियाँ कहती हैं — "हे मधुकर (उद्धव)! तुम चुप हो जाओ, तुम्हारे इस योग (निर्गुण उपासना) की आराधना भला यहाँ (प्रेम भूमि ब्रज में) कौन करेगा? जिनके मन श्...

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अद्भुत गति यह रसिकनिधि, सरस प्रीत की बात

रसनिधि जी कहते हैं— श्रीकृष्ण की मधुर प्रीति अत्यंत अद्भुत है। सामान्यतः अंधकार काले रंग से बढ़ता है, किंतु यहाँ साँवले श्यामसुंदर का स्मरण होते ही ह...

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जिन बारे नँदलाल पै, अपने मन धन ल्याइ

जिन भक्तों ने अपना तन, मन और धन श्रीकृष्ण पर पूर्णतः समर्पित कर दिया है, उनकी महिमा अपरंपार है। उनके विषय में कुछ भी वर्णन करना मेरे सामर्थ्य से परे ह...

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रसनिधि मन मधुकर रमहिं, जो चरनांबुज माहिं

रसनिधि कहते हैं कि जिनका मन रूपी भौंरा श्री राधा-कृष्ण के चरण-कमलों में रम जाता है, उनके लिए संसारी लोगों के लिए सदा बंद रहने वाला प्रभु का स्वरूप सहज...

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रूप दृगन स्रवनन सुजस

मेरे नेत्रों में श्री कृष्ण का स्वरूप, कानों में उनका गुणगान, जिह्वा में उनका नाम और मन में उनके सुंदर चरण-कमल सदा निवास करें।