श्री प्रिया जी ने अपनी सहज मृदु मुस्कान से ही मोहनलाल को बस में कर लिया है। अनुराग में भर जब वे उन्हें सुख देने के लिए ढुरकती हैं तो प्रेम-विवश लाल उ...