हे सुख की राशि स्वरूपा स्वामिनी [श्री राधा], तुम कहाँ हो? कहाँ हो? मुझ शणागत का प्रतिपालन करके मेरे मन की अभिलाषा [तुम्हारे दर्शन एवं सेवा] को पूर्ण क...