श्री रतन अलि
जीवन चरित
श्री श्री रतन अलि वाणी संग्रह
दीन बंधु यह नाम सुनि, मन में भयौ उत्साह
भगवान का “दीनबंधु” नाम सुनकर मन उत्साह से भर गया, क्योंकि मैं दीन हूँ और प्रभु दीनों को अपनाने वाले हैं। परंतु भगवान का “भक्तवत्सल” नाम सुनते ही हृदय ...
जाकैं श्री राधा है इष्ट
जिसकी श्री राधा इष्ट है बस उसी का ही जग में नित्य मंगल है और उसी के समस्त कष्ट मिट जाते हैं। [1] श्री राधा नाम की तुलना किसी से नहीं की जा सकती क्यूँ...
को पूजै अब देवी-देवा
वेदों और शास्त्रों के सार को धारण करने वाले युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की सेवा प्राप्त करने के बाद अब देवी-देवताओं की पूजा कौन करेगा? [1] जिसकी रसना ...
हौं तो जैसो, तैसो स्याम कौ
मैं जैसा भी हूँ, अब श्यामसुंदर का ही हूँ। चाहे मैं खोटा हूँ या खरा, उनके चरणों में पड़ा हूँ, उनका बिना मोल का दास हूँ। [1] जो वस्त्र वे देते हैं, व...
दास कै तो रावरी ये आस बिसवास दृढ़
हे प्रभु! इस दीन दास का दृढ़ विश्वास केवल आप ही पर है। मुझे किसी अन्य का कोई भरोसा नहीं, तो फिर आप क्यों उदास होकर मौन बैठे हैं? [1] हे श्यामसुंदर! म...
Daas Kain To Raavari Ye
(Kavitt)Daas Kain To Raavari Ye Aas Bisvaas Driddh,Kaun Ke Bharosain Tum Hai Udaas Rahe Maun.Aeho Shyaam Bhaarat Pukaarat Hūn Baar-Baar,Tārat Sune Ho ...