श्री सरस देव
जीवन चरित
श्री श्री सरस देव वाणी संग्रह
अब हीं बनी है बात, औसर समझि घात
श्री सरस देव जी अपने निज आश्रित साधक जन (अथवा अपने ही मन से कहते हैं): तेरी बिगड़ी बात बन सकती है, तुझे यह बड़ा सुंदर अवसर मिला है (मानव देह के रूप म...
झूलत दोऊ नवल हिंडोलैं
श्रीप्रियालाल यमुना-पुलिनस्थ कमल-कुञ्ज में एक नये ही प्रकार के झूले में झूल रहे हैं और दोनों एक-दूसरे को प्रेम-प्रफुल्लित विलोचनों से निहार रहे हैं। [...
जुग मुख छबि बरनी न परै री
श्री प्रियालाल के मुखारविन्दों की रूप-माधुरी कहते नहीं बनती। परस्पर प्रेम-भरी बातों से इनके दिव्य श्रीअंगों में अनंग का संचार हो रहा है। नयनों ही नयनो...
श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना
श्री बाँके बिहारी जी महाराज, नित्य विहारिणी श्री प्यारी जू [श्री राधा] के खिलौने के समान हैं जिनके अंगों से विविध प्रकार के रति रंग-रस उत्पन्न होते है...
कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान
एक नित्य विहार का अनन्य उपासक कहता है कि कर्म, धर्म, ज्ञान, विज्ञान एवं नाना प्रकार की भक्ति को हम अपने ह्रदय में आने नहीं देते। और तो और वेद प्रतिपा...
जुग मुख छवि बरनी
श्रीप्रियालाल के मुखारविन्दों की रूप-माधुरी कहते नहीं बनती। परस्पर प्रेम भरी बातों से इनके दिव्य श्रीअगों में प्रेम रूपी अनंग का संचार हो रहा है। नयन...
आजु अति राजति नागरी नाहु
श्यामाकुंज बिहारी की आज की छवि बड़ी ही मोहक है। दोनों परस्पर गलबहियां दिये वृन्दावन की कुन्ज कुन्ज में भ्रमण करते डोल रहे है। [1] पुष्पित लताओं का स्...
श्री बिहारी प्यारी पर हौं वारी
श्री बिहारी जी की प्यारी श्री राधा पर बार बार बलिहारी है जो सदा ही प्रसन्न रहती हैं, अत्यंत सुन्दर हैं, और नित्य ही समस्त सुखों एवं रस को देने वाली है...