हे मित्र, यदि तू बाँके बिहारी की अनन्य भक्ति करेगा तो तू सपने में भी योग, जप, संयम, समाधि, भुक्ति, एवं मुक्ति के सुख को नहीं निहारेगा। [1] श्री बाँके...