सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री वल्लभ रसिक
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री वल्लभ रसिक वाणी संग्रह

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हम तो युगल रूप रस माते नाते के माने

हम तो श्री प्रिया प्रियतम के युगल रूप के रस में उन्मत्त हैं, अत: केवल हम युगल से ही अपना सारा रिश्ता मानते हैं। हम देह के नातेदारों को अपना मानते ही न...

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इन नैंनों मधि मोहन सोहन

मेरी आँखों के मध्य में श्रीकृष्ण का मनमोहक रूप समा गया है। धर्म और शिष्टाचार के मार्ग अब सब भूल चुके हैं और समस्त प्रकार के विधि/निषेध फीके पड़ गए हैं...

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हम जुगल महल रस लिंदा

श्री वृंदावन धाम के अनन्य रसिक जन (इस युगल महल - रस के उपासक) कुञ्ज के अलिंद (द्वार कोष्ठ) को उलांघ कर कभी बाहर नहीं जाते। [1] वृन्दावन तो बहुत बड़ा ...

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जिनके देह नेह परि पूरण

श्री श्यामा श्याम की देह विशुद्ध प्रेम का प्रकाश है जिससे समस्त जग भी प्रकाशित होता रहता है। [1] जिन रसिकों ने उन गौर श्याम वर्ण की देह का स्पर्श किय...