सभी संत
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रसिक संत जीवनी
श्री विल्वमंगल
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री श्री विल्वमंगल वाणी संग्रह
general
अश्रान्तस्मितमरुणारुणाधरोष्ठं
हे मुरलीघर ! तुम्हारे वदनाम्बुज को मैं कब देखूँगा, जिसमें अनवरत स्मित है, अरुण-अरुण अघर हैं, हर्ष से स्निग्ध द्विगुणित मनोहर वेणुगीत हैं तथा जो चंचल त...
general
हस्तमुत्क्षिप्य यातोसि बलात्कृष्ण
हे कृष्ण, यह कौन सी बड़ी बात है कि तुम जबरदस्ती मेरा हाथ छुड़ा कर चले गये, मर्दानगी तो तुम्हारी मैं तब मानूँगा यदि मेरे ह्रदय से निकल कर दिखाओ।
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निबद्धमूर्द्धाञ्जलिरेष याचे
हे श्रीकृष्ण ! मस्तक पर हाथों की अंजलि बाँधकर निरन्तर दीनता की उन्नति से मुक्त कण्ठ से मैं तुम से याचना करता हूँ। हे दयासागर! तुम अपने कटाक्षों की उदा...