सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री वृंदावन दास
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री वृंदावन दास वाणी संग्रह

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कहत जु बात अरी सुनि ललिता

श्री राधा ललिता जू से कहती हैं — अरी ललिता! प्रियतम के संग प्रेम की अंतरंग गोपनीय बातें क्यों प्रकट कर रसधारा बहाती हो? [1] तुम्हें तो और कोई काम ही ...

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कानन मो गति कानन मो पति

यह दिव्य कानन (श्री वृन्दावन अथवा बरसाना धाम) ही मेरी एकमात्र गति (आश्रय) है, यही मेरा स्वामी (पति) है, और यही मेरी माता, पिता तथा भाई है। मैं इस पावन...

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कोऊ कहै अलख अनन्त पुनि कोऊ कहै

कोई उन्हें (भगवान) “अलख-अनन्त” कहता है, कोई उसे “ब्रह्म” या “जोति/प्रकाश” कहकर वर्णित करता है। [1] कोई उसे निर्गुण बताता है, कोई सगुण; और कुछ लोग बिन...

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नमो नमो जु भक्ति रिझवार

मैं उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार करता हूँ जो केवल भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं। जिनका नाम जगत में 'गोपेश्वर' (गोपियों के ईश्वर) के रूप में प्रसिद्ध...

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श्री राधा हौं जानति तो मन की

(एक सखी कहती है) हे श्री राधा! मैं आपके मन की बात भली-भाँति जानती हूँ। अपने प्रियतम (श्री कृष्ण) के विनय भरे वचन सुनकर आपका हृदय द्रवित हो जाता है क्य...