मैं न लोक की और न वेद की बताई अनेक विधियों को मानता हूँ और न ही निपुण साधु-संतों की श्लाघ्य शुद्ध और सुखद हरि भक्ति को। परन्तु मैं तो वन भूमि में सदा ...