श्रीकृष्णचन्द्र प्रियाजी से कह रहे हैं – हे प्रिये ! मेरा शरीर, मन, वाणी एवं प्राण आप में ही हैं, आप निरन्तर मेरे द्वारा नितरां एकमात्र वाञ्छनीय हो अर...