सभी संत
श
रसिक संत जीवनी
श्रीप्रभुदत्त ब्रह्मचारी
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री श्रीप्रभुदत्त ब्रह्मचारी वाणी संग्रह
general
कब इन नयननितै लखूँ वृन्दावन की धूरि
मैं अपने इन नेत्रों से वृन्दावन की उस परम-पावन रज के दर्शन कब करूँगा, जो रसिकों को परम प्रिय है एवं उनके जीवन का आधार है।
general
ब लोटूँ अति विकल ह्वै व्रज-रजमहँ हरषाय
कब मैं अत्यन्त व्याकुल होकर, व्रज की रज में हर्षपूर्वक लोटूँगा? कब उस धूलि को अपने ही अश्रुजल से गीला कर, प्रेम का पंक बना दूँगा और प्रेमाश्रुओं की धा...
dham
कब मेरे मनमहँ बसै वृन्दावन वर धाम
वह शुभ दिन कब आएगा, जब वनराज श्रीधाम वृंदावन मेरे हृदय में ही बस जाएगा? कब मेरी जिह्वा रात-दिन श्रीश्यामा-श्याम के मधुर नामों को प्रेमपूर्वक रटेगी?
shloka
का इन नयननितैं कबहुं निरखूँ रास विलास
हा! क्या इन नेत्रों से मुझे कभी प्रिया-प्रियतम के श्री रास-विलास का दर्शन प्राप्त होगा? क्या कभी ऐसा समय आएगा जब मैं श्री वृन्दावन में अखंड वास करूँगा...