सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्रीराधा प्रिया
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्रीराधा प्रिया वाणी संग्रह

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मेरें तौ वृंदाविपिन, सब सुख कौ आधार

मेरे समस्त सुखों का आधार तो एकमात्र श्री वृन्दावन धाम है, जहाँ समस्त सार का सार तत्व—दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण—नित्य विराजमान हैं।

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जो चाहत जीवन सफल, श्री वृंदावन कौ वास

जो जीव अपना जीवन सफल बनाना चाहता हो, उसे वृन्दावन-वास करना चाहिए और सदा श्री यमुना जी का आश्रय ग्रहण करना चाहिए।

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श्रीराधाकुण्ड की बलि जैये

श्री राधाप्रिया जी कहते हैं "श्री राधाकुण्ड पर बलिहार है, जो सघन लताओं एवं गोवर्धन से आच्छादित है, जिसके जल में कृष्ण ने स्नान किया एवं गोविन्द नाम स...

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सदा सदा राजत जहाँ सघन लतन के झुंड

गिरिराज गोवर्धन की पावन तलहटी में श्रीराधाकुंड अत्यंत सुशोभित है, जहाँ सघन लताओं के कुंज और वन-वाटिकाएँ सदैव अपनी छटा बिखेरती रहती हैं।

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सुख बर्धन मर्दन गरब, गोबर्धन गुन खान

श्री वृंदावन सर्व सुख का सार है। मेरा इस वृन्दावन धाम के अतिरिक्त अन्य कोई दूसरा मेरा प्राण जीवन आधार नहीं है। [1] मैं वृंदावन में, दिव्य युगल श्री र...

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एक नियम ब्रत एक है, एक मेरें आधार

मेरा एक नियम और एक व्रत है, और एक ही आधार है कि मैं नित्य यमुना-जल पान करूँ और श्री राधिका-श्यामसुन्दर के नित्य-विहार का दर्शन करूँ।

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मेरौ एक श्री बृंदाबिपिन सहारौ

मेरा सहारा तो एक मात्र श्री वृंदावन धाम है जहां नित्य ही सुंदर ललित लता कुंजों की छाया विद्यमान रहती है। [1] जहां नित्य ही श्री श्यामा श्याम के दर्शन...

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प्रणवौं बरसानो सुखधाम

मैं बरसाने को प्रणाम करता हूँ, जो सुखों का धाम है। जहाँ श्री कृष्ण और श्री राधा, कीर्ति माँ, वृषभानु जी और श्रीदाम विराजते हैं। [1] जहाँ ब्रह्मपर्वत ...

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एक सहारौ है मेरौ, श्री वृंदाबन धाम

मेरा एकमात्र सहारा श्री वृन्दावन धाम ही है, जहाँ श्री राधा-माधव नित्य दिव्य केलि में लीन रहते हैं और भक्तों को अनंत आनंद प्रदान करते हैं।