सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
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जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री स्कन्द पुराण वाणी संग्रह

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गो कोटि दानं ग्रहणेषु काशी

यदि पूर्ण ग्रहण के अवसर पर काशी धाम में एक करोड़ स्वर्ण मढ़ी सींग वाली गउएँ दान की जायें, दस हज़ार वर्ष तक प्रयाग में कल्प वास किया जाये और यज्ञ करके सु...

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मथुरायां वसिष्यामि यस्यामि मथुरामहं

मैं मथुरा (ब्रज) जाऊँगा, ब्रज वास करूँगा, ऐसी जिसकी बुद्धि होती है, वह भी बन्धन से प्रकृष्ट-मुक्त हो जाता है।

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आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ

आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ आत्माराम तथा प्राज्ञै: प्रोच्यतेगूढ़ वेदिभि: - स्कन्द पुराण, भागवत माहात्म्य (2.6.1.22) श्री कृष्ण कहते हैं की श...

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कुरु भो कुरु भो वासं माथुरियां

हे जीव! जिस मथुरा (ब्रज मंडल) में त्रैलोक्य प्रकाशक गोपी एवं गोविन्द विराजमान हैं, तुम वहाँ वास करो! वास करो!

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त्रिंशद् वर्ष सहस्राणि त्रिंशद् वर्ष शतानि च

वंदनीय भारत भूमि में अनेकों वर्षों तक रहने से जो प्राप्त किया जा सकता है वह एक बार ब्रज मंडल को स्मरण करने से ही मिल जाता है।