श्री वृन्दावन रज इतनी दुर्लभ है कि ब्रह्मा जी बोले : मैंने पहले ही साठ हजार वर्ष तपस्या की, तो भी मैं श्री वृन्दावन की रज (एवं श्रीजी की सखियों की रज)...