भक्ति के विभिन्न चरण हैं। पाँचवीं अवस्था में साधक को अपनी देह-स्मृति का पूर्ण विस्मरण हो जाता है और छठी अवस्था में वह दिव्य महारास के अलौकिक रस का आस्...