"भगवद रसिक रसिक की बातें, रसिक बीना कौ समुज सकेना" - श्री भगवद रसिक, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 4 (6) केवल रसिक संत ही रसिक संत को समझ सकते हैं।