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आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ
आत्मा तू राधिका तस्य तवैव रमणादसौ आत्माराम तथा प्राज्ञै: प्रोच्यतेगूढ़ वेदिभि: - स्कन्द पुराण, भागवत माहात्म्य (2.6.1.22) श्री कृष्ण कहते हैं की श...
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तस्या एवांश विस्तारा
रुक्मिणी सत्यभामा आदि श्रीकृष्ण की जितनी भी रानियाँ और पटरानियाँ हैं, वे सब श्री राधा के अंश से ही आविर्भूत हैं। राधा और कृष्ण सदा-सर्वदा एक दूसरे के ...
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वृन्दावनस्य संयोगात् पुनस्त्वं तरुणी नवा
श्री नारद जी कहते हैं “हे भक्ति, धन्य है ऐसे वृंदावन को, जहाँ पहुँचने पर आपको नव तारुण्य प्राप्त हुआ एवं जहाँ गली-गली घर-घर और प्रत्येक प्राणी के हृदय...