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वंदावन रस रीति
वंदावन रस रीति, रहे विचारत चित्त ध्रुव, पुनि जैहे वय बीति, भजियै नवल-किसोर दोउ । - श्री ध्रुवदास , भजन शत लीला (103) श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि उप...
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वंदावन रस रीति
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि उपासक, अपने मन में श्री वृन्दावन की रसमयी उपासना श्री लाडली लाल युगल स्वरूप का (नित्य ही युगल किशोर अवस्था में रहने वाले)...