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Verses & Passages
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नन्द के कुमार हौं तो कहौं बार बार
हे नंद कुमार तुमसे बार बार यही विनती करता हूँ कि मुझे अब संसार से उबार कर अपने आश्रय में ले लीजिए। [1] काम, क्रोध एवं यम आदि की बेड़ियों को काट कर मु...
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राखो जी लाज गरीब निवाज
हे गरीब निवाज़, मेरी लाज अब तुम्हारे हाथ ही है। तुम्हारे अतिरिक्त ऐसा कौन है जो मेरे बिगड़े काज़ को बना सकता है ? [1] हे श्री हरि, तुम भक्तवत्सल एवं ...
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कंचन की यह भूमि है
श्रीधाम वृंदावन की यह भूमि स्वर्ण जैसी है, जिसने सतोगुण रूपी आभूषण धारण कर रखा है। श्री चरणदास बार बार बलिहारी जा रहे हैं, जिसे केवल दिव्य दृष्टि से ...