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भक्तिसागर

Verses & Passages

9 items
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नितबिहार जहं करैं विहारी । कृष्णकुंवर अरु राधा प्यारी

जहाँ गौर रूप वृषभानु-नंदिनी श्री राधिका तथा साँवले रूप श्री कृष्णचंद्र नित्य विहार करते हैं, ऐसा अद्भुत धाम ही श्री वृन्दावन है।

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गौरीसुत नहिं गा सकै, नहीं शारदा वाम

प्रिया-प्रियतम के निज धाम वृंदावन की महिमा का वर्णन गणेश जी एवं ब्रह्मा जी भी नहीं कर सकते, तो भला ऐसा कौन-सा बुद्धिजीवी है जो श्री वृंदावन धाम का वर्...

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निज वृन्दावन देखिया

उस दिव्य निज वृंदावन धाम का इन्हीं आँखों से अवलोकन किया है, जहाँ नित्य अखंड रास होता है। जहां पिय प्यारी नित्य विहार करते हैं, उसी दिव्य स्थल पर उनकी ...

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श्वासा लेवै नाम बिन सो जीवन धिक्कार

जो श्वास नाम के बिना निकलती है, वह धिक्कार योग्य है, परंतु जिसकी प्रत्येक श्वास में नाम-स्मरण होता है, वही जीवन धन्य और सार्थक है।

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बीस कोस के फेर में वृंदावन को जान

श्री वृंदावन धाम बीस कोस के फेरे में स्थित है जहां की मनमोहक कुंज गलियाँ वृक्षों एवं लताओं से सुसज्जित हैं।

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पंच उपास में हैं नहीं

युगल किशोर श्री श्यामाश्याम शास्त्रों में वर्णित पाँच देवों की उपासना से परे हैं। ये तो रसिकों के परम धन हैं, जो उनके ह्रदय में स्थित अति गोपनीय हैं।

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अवतारी अवतार नहिं ये दोऊ नित्य किसोर

श्री वृंदावन धाम में अखंड नित्य विहार परायण श्री बिहारी बिहारिनी अवतार लीला से परे हैं, जो सदा नित्य किशोर रहते हैं एवं विहार में ऐसे उन्मत्त हैं कि द...

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आसपास बहुकुंज हैं, बीच लाल कौ धाम

श्री वृंदावन धाम में, जहाँ आस-पास अनेक कुंजें हैं और उनके मध्य में (रंगमहल) श्री लाल जी का निज धाम है, वहाँ सखियों के मध्य श्री चरणदास जी प्रिया-प्रिय...

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वृन्दावन की साधुगति कापे बरणी जाय

श्री वृंदावन धाम के रसिकों की गति का वर्णन करना सर्वथा असंभव है क्योंकि जिसकी जैसी दृष्टि होती है उसको वैसे ही दिखती है।