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Verses & Passages
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जद्यपि न्हात न ऊर्ध्व गति
यद्यपि चारों धामों तथा अन्य तीर्थों का जल अत्यंत श्रेष्ठ है और मुक्तिपद देने वाला है, फिर भी वे ब्रज-रज की समता कदापि नहीं कर सकते।
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जग लक्ष्मी सेवत जु वह सेवत हरि के पाय
पूरा संसार लक्ष्मी जी की सेवा करता है, वही लक्ष्मी जी श्री हरि के चरणों की सेवा करती हैं, और वही श्री हरि नित्य श्री राधा के चरणों की सेवा कर उनके चरण...