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Sacred Scripture

किशोरी अली ग्रंथावली

Verses & Passages

17 items
general

हमारैं माई राधा नाम की टेक

हम केवल श्री राधा नाम का जाप करने की प्रतिज्ञा करते हैं। श्री कृष्ण जो सभी रसिकों के सिरमौर है वो भी श्री राधा का नाम ऊँचे स्वर से पुकारते हैं। [1] ...

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हमारें बल इक राधिका प्यारी, प्यारी हू सुख देत सहज ही, जानत निजु सहचारी।

मेरा बल केवल एक श्री राधा प्यारी हैं। उनके समान कृपालु कौन है जो अपनी सहचरी मान कर नित्य (हर क्षण) रस प्रदान करती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि हम ...

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हमैं तो इक आस किशोरी जू की

हमैं तो इक आस किशोरी जू की। रूप-माधरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की। - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से...

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हमारें माई राधेजू प्रान-अधार

हमारें माई राधेजू प्रान-अधार। अली किशोरी गाइ प्रिया-गुन, लहत सदा खुख-सार। - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली केवल और केवल श्री राधा रानी ही हमार...

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हमैं तौ इक आस किशोरीजू की

हमैं तौ इक आस किशोरीजू की। रूप-माधुरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की। भूख लगै तौ सीथ प्रसादी, पावैं भोरी जू की। अली किशोरी करें खवासी, पिय-चित-च...

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हमारो धन इष्ट राधिका प्यारी

हमारी इष्ट और जीवन धन केवल श्री राधिका प्यारी ही हैं। यही हमारी ठाकुर हैं, यही ठकुरानी हैं और यही हमारा सर्वस्व हैं।

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अनुपम वृन्दावन की शोभा

वृन्दावन धाम की शोभा अत्यंत अनुपम है जिसका दर्शन करने मात्र से ही हृदय में प्रेम का अंकुर पैदा हो जाता है ।

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जो कोउ श्री राधा जस गावे

श्री किशोरी अलि जी कहते है, 'श्री राधा' की महिमा अंतहीन है। जो जीव श्री राधा नाम को ह्रदय से पुकारता है तो श्रीकृष्ण, जो श्री राधा नाम के अति लोभी है...

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श्री राधा पद किंकरी

सर्वोत्तम वृन्दावन-रस का मधुर स्वाद वही ग्रहण कर सकता है, जिसके हृदय में श्री राधा के चरणों की किंकरी का भाव हो।

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हमैं तौ बल एक लाड़िलीजू कौ

हमारा बल एक मात्र श्री राधा रानी है। हमें किसी और से क्या काम (चाहे वो भगवान् हो)? हमारी स्वामिनी और सर्वस्व तो एक मात्र किशोरी जी ही हैं।

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हमारी लाड़िली ही इष्ट

हमारी इष्टदेव तो केवल लाडिली सरकार श्री राधारानी ही हैं, जिनका नित्य नाम जप करने से कभी भी कुछ भी अनिष्ठ (अमंगल) नहीं हो सकता। श्री किशोरी अली कहते है...

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हमैं इक लाड़िली सौं काम

हमें तो केवल श्री राधा से ही काम है जो हमारी स्वामिनी हैं। हर दिन, हर क्षण, हम श्री राधा के रूप का ही चिंतन करते हैं और हम श्री राधा के नाम का ही जप क...

general

हमारी राधे प्रीति-रीति पहिचानैं

प्रीति की रीति को तो एकमात्र हमारी श्री राधा ही जानती हैं। इनके सिवा इस निष्काम प्रेम की रीति के मार्ग को कोई नहीं जानता है।

shloka

श्री राधा पद किंकरी, भाव जासु हिय होये।

सर्वोत्तम वृन्दावन रस का मधुर स्वाद वही ले सकता है जिसके हृदय में श्री राधा पद किंकरी का भाव हो।

shloka

अनुपम वृन्दावन की शोभा

वृन्दावन धाम की शोभा अत्यंत अनुपम है जिसका दर्शन करने मात्र से ही हृदय में प्रेम का अंकुर पैदा हो जाता है |

shloka

हमारें बल इक राधिका प्यारी, प्यारी हू सुख देत सहज ही, जानत निजु सहचारी।

मेरा बल केवल एक श्री राधा प्यारी हैं। उनके समान कृपालु कौन है जो अपनी सहचरी मान कर नित्य (हर क्षण) रस प्रदान करती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि हम ...

shloka

जो कोउ श्री राधा जस गावे

श्री किशोरी अलि जी कहते है, 'श्री राधा' की महिमा अंतहीन है। जो जीव श्री राधा नाम को ह्रदय से पुकारता है तो श्रीकृष्ण, जो श्री राधा नाम के अति लोभी है ...