समस्त नवीन रस भी मान-माधुरी रूपी सर्वोपरि रस के बिना फीके प्रतीत होते हैं। एक बार इस परम माधुर्य-रस की प्राप्ति हो जाए, तो मन फिर किसी अन्य रस में नही...