SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasमन शिक्षा
All Books
Sacred Scripture

मन शिक्षा

Verses & Passages

7 items
general

रतिं गौरीलीले अपि तपति सौन्दर्यकिरणैः

हे मन! जो अपनी सौन्दर्य-किरणों से रति, गौरी एवं लीला को सन्तप्त करने वाली हैं, सौभाग्य समूह से जो इन्द्राणी, लक्ष्मी तथा सत्यभामा को पराजित करने वाली ...

general

ब्रजमण्डल वृंदावन मैं फिरी सफल किए नहिं पाय

यदि ब्रजमण्डल एवं वृंदावन में भ्रमण कर भी अपना जीवन सफल न बनाया, तो मानो यह दुर्लभ मानव-जीवन पाकर भी मूर्खता-वश नष्ट कर दिया।

general

याही तैं, रसिकन की बानी, गहि तू तत्त्व छनी है

रसिकों की वाणी परम तत्त्व का सार है, क्योंकि उसमें श्री श्यामाश्याम का नित्य निवास है। श्री किशोरी जी के चरणों की शरण को छोड़कर भटकने में क्या लाभ होगा...

general

वृंदावन बसि, वृंदावन बसि, वृंदावन सुखदाई रे

वृन्दावन में बसना ही परम सुखदायी है क्योंकि यह वृन्दावन ही सब प्रकार से सुख देने वाला है जहाँ हमारे लाड़ले दम्पति (श्री राधा-कृष्ण) सदैव अखंड रूप से वि...

general

रसिक जननि कौ संग मनोहर

श्री किशोरी अलि जी पुकार कहते हैं कि रसिकों का संग अत्यंत मनोहर और कल्याणकारी है; जो साधक उनके संग में रहकर उनकी वाणी का मनन करता है, उस पर श्री प्रिय...

general

यथा दुष्टत्वं मे

अरे मन! तू इस श्रीब्रज धाम में ऐसी दीनतामय व्याकुलता से श्रीगिरिधारी जी [श्री कृष्ण] का भजन कर, जिससे वे कृपा करके मुझ जैसे शठ का भी दुष्ट स्वभाव दूर ...

general

वृन्दावन, वृन्दावन, वृन्दावन कहि रे

हे जीव! "वृंदावन वृंदावन वृंदावन" कह, और श्री वृंदावन धाम की शरण शीघ्र ग्रहण कर। [1] अपनी सांसारिक कामनाओं की पूर्ति हेतु क्यों तू देश देश भटक रहा है...