अर्थात- भगवान शंकर कहते हैं कि मथुरा-मंडल में श्रीवृन्दावन, जो पाँच योजन में फैला हुआ है, सभी उत्तम तीर्थों से भी उत्तम है। यहाँ पर और भी कुछ न हो सके...