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पातालखण्ड

Verses & Passages

6 items
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अन्येषु पुन्य क्षेत्रेषु मुक्तिरेव महाफलम्

अन्य पुण्य क्षेत्रों में मुक्ति ही महाफल है। और मुक्त जनों की प्रार्थनीय हरिभक्ति मथुरा (ब्रज) में प्राप्त होती है। हे मुने! जो मनुष्य मथुरा तीन रात्र...

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स्त्रियो म्लेच्छास्च पशवः

स्त्रियाँ, म्लेच्छ, पशु, पक्षी, अथवा मृग—जो भी ब्रज में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, वे सब परम गति को प्राप्त कर लेते हैं।

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पूर्णब्रह्मसुखैश्वर्यं नित्यमानंदमव्ययम्

पृथ्वी पर स्थित वृंदावन पूर्ण ब्रह्म का साकार रूप है जो परम सुख, ऐश्वर्य एवं नित्यानंद से परिपूर्ण है। वैकुंठ आदि लोक तो इसके केवल अंश मात्र हैं।

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बहु जन्मानि पापानि

बहु जन्मों के संचित पाप मथुरा (ब्रज मण्डल) के प्रभाव से क्षण मात्र में नष्ट हो जाते हैं।

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दुर्लभानां च परमं दुर्लभं मोहनं

- पद्मपुराण, पातालखण्ड(5.69.7) पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत ...

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दुर्लभानां च परमं दुर्लभं मोहनं

पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत दुर्लभ, सर्व मूर्धन्य नित्य वृन्...