श्री चरण दास कहते हैं कि नित्य-विहार-रस परम अद्वितीय है, जिसका पार राम, कृष्ण, विष्णु आदि के भक्त भी नहीं पा सकते, और जिसे ललिता जी (स्वामी हरिदास) की...