Verses & Passages
33 itemsभूतल में वृंदा विपिन ए सर्वोपरि आहि
भूतल में वृंदा विपिन, ए सर्वोपरि आहि। बड़ी भूल नहिं बस सकै, फिर कव पावै ताहि॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (7) इस भूतल पर स्थित श्रीधाम वृन्दावन...
श्री वृंदावन धाम में साधक सुख अवगाऊ
श्री वृन्दावन धाम का ऐसा चमत्कार है कि साधक अभी साधना-अवस्था में ही ऐसे सुख में गोते लगाता है कि वह रस-सिंधु में मग्न हो जाता है और वह सिद्ध अवस्था (भ...
सोवत जागत रैन दिन चलत फिरत सुष होत
श्री धाम वृंदावन में चाहे सो रहे हों या जाग रहे हों, रात हो या दिन, चलते-फिरते हर समय केवल रस ही रस अनुभव होता है। कारण यह है कि श्री राधा-कृष्ण के रू...
श्री बैकुंठ गोलोक लों गए परम रस चाह
परम रस की खोज में अनेक जन श्री वैकुण्ठ और गोलोक तक गए, किन्तु उस रस की पूर्ण तृप्ति न पाकर वे पुनः श्री वृन्दावन धाम लौट आए। यह वृन्दावन वह पावन स्थान...
श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल
जब श्री वृंदावन की माधुरी का दिव्य प्रभाव हृदय पर छा जाता है, तब श्री राधा-मोहनलाल के अनुपम गुण, सौंदर्य और छवि का उफान भीतर उमड़ने लगता है।
प्रेम सरोवर प्रेम सों पूरन परम रसाल
बरसाना स्थित प्रेम-सरोवर प्रेम से पूर्ण और परम रसाल है, जहाँ श्री राधा-कृष्ण के प्रेमाश्रु प्रवाहित हुए थे। उस दिव्य जल के तनिक से भावपूर्ण स्पर्श से ...
जो है तो में मति कछू वस वृन्दावन षेत
यदि भगवान की कृपा से अंतःकरण में थोड़ा भी विवेक प्रकट हुआ है, तो साधक को वृंदावन-रूपी रस-भूमि में ही निवास करना चाहिए, जहाँ अपनी सेज पर सोते हुए (विश...
प्रगट करी व्रज भूमि मधि श्री वृंदावन धाम
श्री प्रिया-प्रियतम ने ब्रज-भूमि के मध्य श्री वृंदावन धाम को प्रकट किया। इसके गुणों का वर्णन करते-करते रसिक संत भी थक जाते हैं, क्योंकि यह धाम सबके मन...
श्री बैकुंठ गोलोक लों गए परम रस चाह
जब तक मन में खान-पान, विषय-वासना और संसार के भौतिक सुख भोगों की लालसा बनी रहती है, तब तक श्री वृन्दावन धाम के वृक्ष और यहाँ की रज-वीथियाँ हृदय को प्रि...
ताते वृंदावन बसो वृंदावन लेवो नाम
यह मानव देह रूपी अत्यंत दुर्लभ संयोग है, अतः सर्वस्व त्यागकर श्रीवृंदावन का ही आश्रय लो, श्रीवृंदावन नाम का ही सुमिरन करो और एक पल के लिए भी इस रज का ...
रसिक जननी के संग सों
जीव को हर स्थिति में रसिक संतों का संग सदा करते रहना चाहिए क्योंकि जो एकांत साधना से जीव के ह्रदय में भाव आता है वह रसिकों के संग से एक क्षण में आ जात...
कौन भूमि की माधुरी डोलनि परमानंद
ब्रज भूमि के अतिरिक्त ऐसी कौन सी भूमि है जिसकी ऐसी विशेष माधुरी है जहां पर परमानंद डोलता हुआ फिरता है। ऐसा कौन सा रसिक कवि है जो इसकी महिमा कहने में स...
मिल्यौ सबै कछु जो
वृंदावन रस का उपासक कहता है कि चाहे सब कुछ क्यों न मिल जाए परंतु यदि श्री वृंदावन धाम न मिले तो हृदय की दृढ़ पीड़ा बनी ही रहती है।
राधा वल्लभ लाल को दुर्लभ दरसन पाय
श्री राधा वल्लभ लालजी के दुर्लभ दर्शन केवल श्रीधाम वृंदावन की कृपा से सुलभ होते हैं, जिनके दर्शन पाकर शरीर प्रेम से रोमांचित हो उठता है।
जब वृन्दावन धाम के प्यारे लागें रूष
जब श्रीधाम वृंदावन के वृक्ष लातायें-पताएँ आदि ह्रदय को प्रिय लगने लगती हैं तब समस्त सम्पति एवं भौतिक सुख तुच्छ लगते हैं और इनकी भूख स्वतः ही समाप्त हो...
फिरति रहे वन भूमि में झूमि नैन अकुलाय
मैं श्री वृंदावन धाम की परम पावन भूमि में आनंदपूर्वक झूमते हुए विचरण करूँ, जहाँ मेरे नयन सदैव दिव्य दंपति श्री राधा-कृष्ण के दर्शन की लालसा में व्याकु...
तजि के सब पौरस प्रबल मानें तन गुण हीन
समस्त पौरुष बल और अहंकार का परित्याग करके, स्वयं को गुणहीन और असहाय मानते हुए, श्रीधाम वृंदावन में सदा ऐसे निवास करना चाहिए, जैसे कोई मछली जल में ही व...
रीझि परे छवि धाम पर करि नौंछावरि देह
जब कोई जीव श्री वृंदावन धाम से रीझकर स्वयं को श्रीधाम पर न्योछावर कर देता है, तब स्त्री, पुत्र, धन, घर आदि की आसक्ति उसे परम तुच्छ प्रतीत होने लगती है...
लाख अंग हरि भक्ति के, चौसठ महा प्रकास
रसिकों ने श्री हरि भक्ति के लाखों अंगों में से चौंसठ अंगों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है। उन चौंसठ में भी पाँच अंगों को अत्यंत विशेष माना गया है...
प्रभुता दासी ह्वैं रहे
श्रीधाम वृंदावन वह भूमि है जहाँ साक्षात प्रभुता भी दासी स्वरूप धारण कर निवास करती है जिसका मूल ढूँढने से भी नहीं मिलता। जब कोई जीव इस श्री धाम में अन...
बरसानो वृषभानु को लखी साँकरी खोर
वृषभानु जी के बरसाने में एक साँकरी खोर (सँकरी गली) है जहाँ से साखियों सहित श्री लाड़िलीजी (श्री राधा) स्वयं गुज़रती हैं।
ढिंग विलास-गढ़ दान-गढ़ और मान-गढ़ नाम
बरसाना के विलासगढ़, दानगढ़ और मानगढ़ नामक दिव्य लीला-स्थलों में गौरवर्णी श्री राधा की प्रेम-घटा निरंतर उमड़ती रहती है, जहाँ श्री कृष्ण, चातक के समान, ...
निपट प्रबल साधन करें तऊ मिलै तन त्याग
श्री धाम वृन्दावन की अपार महिमा का वर्णन करते हुए श्री प्रिया दास जी कहते हैं कि कठिन साधनाओं से जहाँ अंत में केवल देह-त्याग ही होता है, भगवद्-प्रेम ह...
परम रसिकनी लाड़िली जाको महल रसाल
श्री राधिका परम रसिकनी हैं और उनका महल अत्यन्त रस-माधुरी से परिपूर्ण है। जब वे किसी पर प्रसन्न होती हैं, तभी कृपा करके उसे श्री वृन्दावन का वास प्रदा...
दरसन मिलवो बोलिवो रसिक जननि सों होय
दरसन मिलवो बोलिवो, रसिक जननि सों होय। दुर्लभ जो नहिं पाइये, छिन में पावे सोय॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (12) यदि वृन्दावन के रसिकजनों का संग ...
भूमि सुभग तरु लता छवि सुधि बुधि सब हर लेत
भूमि सुभग तरु लता छवि, सुधि बुधि सब हर लेत। अटक परे चित चीकनो, कहूँ चलत नहिं देत॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (13) श्री वृन्दावन धाम की भूमि मध...
Taji Ke Sab Pauras Prabal Maane Tan Gun Heen
Taji Ke Sab Pauras Prabal, Maanen Tan Gun Heen.Base Nirantar Vipin Mein, Jyon Jal Jeevan Meen.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (6)One should renounce ...
Reejhi Pare Chhavi Dhaam Par
Reejhi Pare Chhavi Dhaam Par, Kari Naunchaavari Deh.Tab Tiy Sut Dhan Aadi Dain, Poochhai Ko Tujh Geh.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (20)When one bec...
Lakh Ang Hari Bhakti Ke Chausath Maha Prakas
Lakh Ang Hari Bhakti Ke, Chausath Maha Prakas.Tahu Mein Puni Paach Kahi, Kahyo Ek Vanvaas.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (4)Among the hundred thousa...
Prabhuta Dasi Hvain Rahe
Prabhuta Dasi Hvain Rahe, Khoje Milain Na Mool.Jab Atakyau Ya Dham Son, Hot Sabai Anukool.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (14)Even the Lordship itsel...
Barsano Vrishbhanu Ko Lakhi Saankari Khor
Barsano Vrishbhanu Ko, Lakhi Saankari Khor.Sakhin Sahit Shri Ladili, Nikasat Yahi Or.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (22)In Barsana, the town of King...
Dhing Vilasgarh Dangarh, Aur Mangarh Naam
Dhing Vilas-garh Daan-garh, Aur Maan-garh Nam.Gaur Khata Unvati Ihan, Chatrik Vah Ghanshyam.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (23)In the divine līlā-pl...
Nipat Prabal Sadhan Karein Tau Mile Tan Tyag
Nipat Prabal Sadhan Karein, Tau Mile Tan Tyag.Bin Sadhan Tan Sahat Hi, Mile Chade Ras Paag.- Shri Priyadas Ji, Rasik Mohini (8)Śrī Priyā Dāsa Jī, desc...