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श्रद्धाभक्त्योरभावेपि भगवन्नामसंकीर्तन
मन में श्रद्धा भक्ति न भी हो तो भी भगवान के नाम का संकीर्तन सब पापों का नाश कर देता है, फिर यदि श्रद्धा हो तब तो बात ही क्या है।
shloka
श्रद्धाभक्त्योरभावेपि भगवन्नामसंकीर्तन
मन में श्रद्धा भक्ति न भी हो तो भी भगवान के नाम का संकीर्तन सब पापों का नाश कर देता है, फिर यदि श्रद्धा हो तब तो बात ही क्या है।