Verses & Passages
5 itemsमन मेरे भज ले श्री कुंजबिहारी
(राग कलिंगडा) मन मेरे भज ले श्री कुंजबिहारी। सब सुख सागर रूप उजागर अंग संग प्रीतम प्यारी। श्री वृन्दावन घन नव निकुंज में करत केली भुजचारी। श्री बिहारी...
मेरे गति ब्रजपति के ब्रजवासी
मेरी गति तो साक्षात् श्री बिहारी बिहारिनि जू के दृढ़ उपासक श्री ब्रजवासी ही हैं, जिनकी प्राण जीवनी धन एक मात्र श्री वृन्दाविपिन विलासिनी प्यारी जू श्री...
मेरे विषै विसन वर वाम
मेरे विषै विसन वर वाम, तन गोरी मन भोरी नवल किशोरी राधा नाम । निस बासर जागत सोवत चितवत अंग अंग अभिराम । - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की ब...
जै श्रीवृन्दावन घन नव निकुंज
श्री वृन्दावन के नित्य नव निकुंज में सहज ही युगल सरकार बिराजते हैं और अत्यंत रहस्मय रस बरसाते हैं। यह रस अगाध है और इसकी महिमा का वर्णन करना असंभव है,...
मोहिं ब्रजबासिन सों बनि आई
श्री बिहारिन देव जी कहते हैं, कि ब्रजबासिन से हमारा प्रेम पुराना है, जिनके तन, मन में निरंतर एकमात्र श्री बिहारी-बिहारिनीजू ही बसे हुए हैं। [1] नका ह...