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Sacred Scripture
श्री कल्याण पुजारी जी की वाणी
Author:Unknown Rasik
Verses & Passages
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प्रभु तुम्हरी कृपा अपार है, मेरेहु दोष अपार
हे प्रभु! आपकी कृपा की कोई सीमा नहीं है, वह अनंत और अपार है, परंतु दूसरी ओर मेरे अपराध और दोष भी अनगिनत हैं। इस प्रकार हम और आप एक-दूसरे के समतुल्य है...
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श्रीराधिका चरन सर्वोपर
जिन चरणों को ब्रजराज श्री कृष्ण दौड़ कर अपने शीश से प्रेम पूर्वक लगाते हैं, ऐसे श्री राधिका चरण ही सर्वोपरि हैं। [1] जो ब्रजराज संपूर्व वैभव से संयुक...