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Sacred Scripture

श्री कृष्ण कर्णामृतम

Verses & Passages

10 items
general

श्रृङ्गाररससर्वस्वं शिखिपिच्छविभूषणम्

(समस्त) भुवनों के आश्रय (श्रीकृष्ण) का मैं आश्रय लेता हूं जो श्रृंगार रस के सर्वस्व हैं, जिन्होंने मोरपंख का भूषण धारण कर रखा है और जिन्होंने पुरुष क...

general

मणिनूपुरवाचालं वन्दे तच्चरणं विभोः

मैं उन विभु भगवान् श्रीकृष्ण के उन चरणारविन्द को प्रणाम करता हूँ जो मणिमय नूपुरों से वाचाल हैं अथवा मणि तथा नूपुरों की द्रुतगति से मुखर हैं और जिनके ल...

general

पुनः प्रसन्नेन्दुमुखेन तेजसा

हे श्रीकृष्ण! प्रसन्न चन्द्रमा के समान मुख वाले तेज से मेरे सामने पुनः प्रकट होने वाली श्रीकृष्णकृपासमुद्र की उसी लीला-मुरली की नादामृत-लहरी से कब मेर...

general

अमून्यधन्यानि दिनान्तराणि हरे

हे अनाथवन्धु ! हे करुणासागर ! हे हरि श्रीकृष्ण ! तुम्हारे दर्शन के बिना इन अधन्य दिनों के मध्य भागों को कैसे बिताऊँ ?

general

मयि प्रसादं मधुरैः कटाक्ष

हे श्रीकृष्ण ! वंशी के नाद के अनुचर मधुर कटाक्षों से मुझ पर कृपा करो। तुम्हारे प्रसन्न होने पर इस संसार में दूसरे विषयों से क्या प्रयोजन है ? तुम्हारे...

general

अश्रान्तस्मितमरुणारुणाधरोष्ठं

हे मुरलीघर ! तुम्हारे वदनाम्बुज को मैं कब देखूँगा, जिसमें अनवरत स्मित है, अरुण-अरुण अघर हैं, हर्ष से स्निग्ध द्विगुणित मनोहर वेणुगीत हैं तथा जो चंचल त...

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जय जय जय देव देव देव

हे देव तुम्हारी जय हो। जय हो। जय हो। तुम्हारा नाम दिव्य है और त्रिभुवन में मंगल करने वाला है। हे देव हे कृष्णदेव तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो। तुम कान...

general

हस्तमुत्क्षिप्य यातोसि बलात्कृष्ण

हे कृष्ण, यह कौन सी बड़ी बात है कि तुम जबरदस्ती मेरा हाथ छुड़ा कर चले गये, मर्दानगी तो तुम्हारी मैं तब मानूँगा यदि मेरे ह्रदय से निकल कर दिखाओ।

general

मधुरं मधुरं वपुरस्य विभोर्मधुरं

इस विभु श्रीकृष्ण का मधुर भी शरीर और मधुर है। इसका मधुर वदन मधुरातिमधुर है। इसका मधुगन्धयुक्त मृदु स्मित महामधुर होने पर भी और मधुर है।

dham

निबद्धमूर्द्धाञ्जलिरेष याचे

हे श्रीकृष्ण ! मस्तक पर हाथों की अंजलि बाँधकर निरन्तर दीनता की उन्नति से मुक्त कण्ठ से मैं तुम से याचना करता हूँ। हे दयासागर! तुम अपने कटाक्षों की उदा...