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निज मन में अनुभव भयौ
श्री ललिता सखी के महाप्रसाद स्वरूप इस नित्य-विहार का निज मन में ही अनुभव हुआ है; ऐसी अगोचर वस्तु का स्फुरण हुआ है जो नित्य, अनंत और अनादि है।
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जोगी ज्ञानी कर्मठी
अनन्य रसिकों का मार्ग योगियों, ज्ञानियों, कर्मठों और तपस्वियों के मार्ग से अत्यन्त भिन्न और दूर होता है। अनन्य रसिकों के नयनों में तो नित्य ही भरपूर र...