All Books
Verses & Passages
3 itemsgeneral
मो मन ऐसी अटक परी
श्री पीतांबर देव सहचरी स्वरूप से कहते हैं कि मेरा मन श्री कुंज बिहारी श्री कुंज बिहारिनी के विपिन विहार में ऐसा अटक गया है कि वह नित्य ही प्रिया प्रिय...
general
जय राधा, जय राधा
श्री राधा की जय हो, श्री राधा की जय हो। गौर वर्ण श्री राधिका नीलाम्बर से सुशोभित हैं जिनके आभूषणों की दीप्ति अगाध है। [1] सहचरियों के मध्य में विरा...
general
बिहार है आगार रस को
श्री पीताम्बर देव जी वर्णन करते हैं कि रसिकों के अनुग्रह (कृपा) से ही सागररूप (आगार—जिसका आदि और अंत नहीं है) नित्य-विहार-रस की प्राप्ति होती है। किसी...