SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasश्री रसिक देव जी की वाणी
All Books
Sacred Scripture

श्री रसिक देव जी की वाणी

Verses & Passages

8 items
general

महल ते निकसी न बाहर आवैं

वृंदावन रस एवं निज महल श्री राधा की सखियां, निज महल से बाहर नहीं जाती, वह कुंज कुंज में ही श्री राधा कृष्ण के संग खेल मचाती रहती हैं। जहां नन्द के कुम...

general

श्रीबिहारीजू खेलत बसंत

श्रीबिहारी जी वसन्तका खेल-खेल रहे हैं। आनन्द से भरी सब सखियाँ भी वहाँ उपस्थित हैं और हैं श्री किशोरी जी जिनके प्रत्येक अंग में रूप खिला है। [1] इनके ...

general

खटकौ नहीं उसास को

श्री रसिक देव जी को न जीवन-मरण की चिंता है, न ही सांसारिक संबंधों का आकर्षण। उनके मन में तो गौर-साँवले श्री राधा-कृष्ण ही बसे हैं; चाहे लाख लोग आएँ या...

general

दूलह दुलहिन अधिक बनी

नित्य दूल्हा दुलहिन श्री राधा कृष्ण आज सम्पूर्ण श्रृंगार से सज्जित हैं। दोनों कल्पतरु वृक्ष की पूजा करने चले हैं, लेकिन आज यहाँ बात कुछ और है। [1] सख...

general

रसिक निमिष नहिं बीछुरैं, ना दुरि बैठें और

हमारे रसिक बिहारी-बिहारिनी एक क्षण के लिए भी परस्पर से अलग नहीं होते और कहीं दूर भी नहीं बैठते। इस दिव्य विहार में मान केवल इतना-सा होता है कि नयनों ...

general

मंद हँसनि मुख कमल की

अपने मुख-कमल पर मंद-मंद मुस्कान एवं तिरछी चितवन से मेरी ओर निहार कर, श्री राधा ने मुझे अपने वश कर, मेरे प्राणों का हरण कर लिया।

general

स्याम हौं तुम्हरे गरैं परयौ

हे श्री बांके बिहारी जी महाराज मैं आपके गरे ही पढ़ गया हूँ, मैं तो केवल आपकी ही शरण में आया हूँ, ओर मेरे जीवन के पल आपसे ही बीते हैं, अब आपके मन में जै...

general

स्याम हौं तुम्हरे गरैं परयौ

हे श्री बांके बिहारी जी महाराज मैं आपके गले अर्थात् आपकी शरण में ही आ गया हूँ, मैं तो समस्त साधन और साध्य को त्याग कर, केवल आपकी ही शरण में आया हूँ,और...