SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasश्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी
All Books
Sacred Scripture

श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी

Author:Unknown Rasik

Verses & Passages

7 items
general

आवत लाडिली लाल फूले

प्रातःकालीन छटा का चित्रण करती हुई श्रीविपुल बिहारिनदासीजी कह रही हैं कि रस में प्रफुल्लित श्रीलाड़िली लाल आ रहे हैं। कुज-केलि के नवरंग में अनुरंजित सु...

general

लालहिं बस करनी, मदन मन हरनी

रूप की राशि श्रीराधा लाल को सहज ही अपने वश में कर लेने वाली हैं, कामदेव का प्रचंड दर्प तो उन्हें देखते ही चूर चूर हो जाता है, अपने यौवन के उल्लास में ...

general

मेरौ लाल रंगीलौ रंग भर्यौ

हे किशोरी श्री राधा ! मेरे रंगीले लाल (श्री कृष्ण) में तो एक मात्र प्रेम-रस-रंग ही भरा हुआ है। [1] हे किशोरी जू, जो आपको भाए वह कीजिये क्योंकि लालजी ...

general

प्यारी तेरी चाल चितवन बाँकी

सहचरी भावापन्न श्री विट्ठल विपुल देव जी श्री राधा रानी से कहते हैं: हे प्यारी! आज आपकी चालचलन एवं चितवन में विशेष रस बंकता उदभासित हो रही है। आपके श्र...

general

प्रातहीं किसोर जोरि कुंज-केलिनी

प्रातःकालीन सुरत रस-माधुरी का वर्णन करती हुई श्री विपुलबिहारिनदासी कहती हैं- दिव्य युगल किशोर-किशोरी की जोड़ी कुंज-भवन में केलि-परायण है।[1] रूप-राश...

general

लाल करत तेरे गुन गानैं

श्री लाल जी (श्री कृष्ण) की रस पिपासु दैन्य स्थिति जान कर विट्ठल विपुल सखी माननी श्री प्रिया जी (श्री राधा) से बोलीं - हे प्यारी जू, मैं शपथ खाकर कहती...

general

जिन रूठौ लागौं तिय पैयाँ

प्रियाजी की मनुहार करते हुए लाल निवेदन कर रहे हैं कि आपके चरणारविन्द में मैं नत हूँ, कृपया आप रूठें नहीं। हे सुन्दरि आपके श्रीअंग की माधुरी मेरे वक्ष...